Lokmanya Tilak Biography in Hindi

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1880 में पुणे में न्यू इंग्लिश स्कूल की स्थापना.

1881 में जनजागरण के लिए ‘केसरी’ ये मराठी और ‘मराठा’ ये इंग्रेजी ऐसे दो अखबार प्रसिध्द करने के लिए शुरुवात की. आगरकर केसरी के, तो तिलक मराठा के संपादक बने.

1884 में पुणे में डेक्कन एज्युकेशन सोसायटी की स्थापना.

1885 में पुणे में फर्ग्युसन कॉलेज शुरू किया गया.

1885 में राष्ट्रीय सभा स्थापन हुई थी.लोकमान्य तिलक उसमे शामिल हुए.

इसके आगेके समय में सामाजिक सुधार के सवाल पे तिलक और आगरकर इनमें मतभेद निर्माण हुए. इस वजह से आगरकर इन्होंने 1887 में केसरी के संपादक पोस्ट का इस्तीफा दिया और तिलक ‘केसरी’ के संपादक बने. अपने इस अख़बार के माध्यम से तिलक ने राष्ट्रीय विचारो का प्रचार और प्रसार करने का कार्य किया.

1893 में ‘ओरायन’ नाम के किताब का प्रकाशन.

लोगों मे एकता की भावना निर्माण करने के लिए तिलक इन्होंने ‘सार्वजानिक गणेश उत्सव’ और ‘शिव जयंती उत्सव’ शुरू किया.

1895 में मुम्बई प्रांतीय विनियमन बोर्ड के सभासद इसलिए उनको चुना गया.

1897 में तिलक इनपर राजद्रोह का आरोप लगाकर उन्हें देड साल की सजा सुनाई गयी. उस समय तिलक ने अपने बचाव में जो भाषण दिया था वह 4 दिन और 21 घंटे चला था.

1903 में ‘दि आर्क्टिक होम इन द वेदाज’ नाम के किताब का प्रकाशन.

1907 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सूरत यहाँ भरे हुए अधिवेशन में जहाल और मवाल इन दो समूह में का संघर्ष बहोत बढ़ गया इसका परिणाम मवाल समूह ने जहाल समूह को कांग्रेस संघटने से निकाल दिया. जहाल का नेतृत्व लोकमान्य तिलक इनके पास था.

1908 में तिलक इनपर राजद्रोह का मामला दर्ज हुआ. उसमे उनको छे साल की सजा सुनाई गई और उन्हें ब्रम्हदेश के मंडाले के जेल में भेज दिया गया. मंडाले के जेल में महापुरुषों के अलग अलग ग्रन्थ मंगवाके ‘गीतारहस्य’ का अमर ग्रन्थ लिखा. इतनाही नहीं तो जर्मन और फ्रेंच इस दो समृद्ध भाषा में के महत्वपूर्ण ग्रन्थ पढने आने चाहिए इस लिए उन भाषाका भी अभ्यास किया.

1916 में उन्होंने डॉ. अनी बेझंट इनके सहकार्य से ‘होमरूल लीग’ इस संघटने की स्थापना की. भारतीय होमरूल आन्दोलन ने स्वयं शासन के अधिकार ब्रिटिश सरकार को मांगे. होमरूल यानि अपने राज्य का प्रशासक हम करे. एसेही ‘स्वशासन’ कहते है. ‘स्वराज्य मेरा जन्मसिध्द अधिकार है और मै इसे लेकर रहूँगा’ ऐसा तिलक इन्होंने विशेष रूप से बताया. होमरूल आन्दोलन की वजह से राष्ट्रिय आन्दोलन में नवचैतन्य निर्माण हुआ.

लोकमान्य तिलक इन्होंने स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा और स्वराज्य इस चतु: सूत्री

हिन्दी ये राष्ट्र भाषा होनी चाहिए ये घोषणा तिलक इन्होंने सबसे पहले की.

ग्रन्थ सम्पत्ति :
आरोयन(1893), दि आर्क्टिक होम इन द वेदाज (1903), गीतारहस्य आदि.

विशेषता :
भारतीय असंतोष के जनक.
लाल – बाल – पाल इन त्रिमुर्तियो में से एक.

मृत्यु : 1 अगस्त, 1920 को लोकमान्य तिलक इनकी मुंबई में मौत हो गयी.

तिलक देश हालत सुधारने के लिए और स्वराज्य प्राप्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करते रहे. लोकमान्य तिलक का नाम भारत की स्वतंत्रता के इतिहास में सदा अविस्मरणीय रहेंगा.

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